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आस्था औऱ विश्वास की भूमि अदितिवन




Chandigarh, 11 Sep, 2018 NewsRoots18
डॉ राजेश चौहान- भूमि का भाग्य होता है, कि वह किस इतिहास को रचने की साक्षी रही। कोई धर्म भूमि है तो कोई कर्म भूमि है, किन्तु कुछ भूमि धर्म और कर्म के अतिरिक्त आस्था औऱ विश्वास को जन्म देती हैं। उन्हीं में से एक है अदितिवन, जिसका उल्लेख पुराणों में विशेष तौर पर मिलता है। अदिति वन सूर्य कुंड महाभारत की 48 कोस भूमि का प्राचीन एवं महत्वपूर्ण तीर्थ है। वामन पुराण के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब दैत्यों का पराक्रम बढ़ गया और देवता क्षीण हो गए। देवताओं की माता अदिति चिंतित हुई। 



इसी स्थान पर देवताओं की माता अदिति ने लंबे समय तक तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप उनके गर्भ से मार्तंड सूर्य ने जन्म लिया था। मार्तंड सूर्य माता अदिति और कश्यप ऋषि की सोलहवीं संतान थे। मार्तंड सूर्य का जन्म भाद्र पद के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को हुआ था। मार्तंड सूर्य ने अपने बल से दैत्यों को पराजित कर देवताओं को पुनः प्रतिष्ठापित किया। सदियों से मार्तंड सूर्य की जयंती पर अदिति वन सूर्यकुंड तीर्थ पर मेले की परंपरा चली आ रही है। हजारों श्रद्धालु इस दिन सूर्य कुंड तीर्थ में स्नान करते हैं। किवदंतियों के अनुसार इस दिन सूर्य कुंड में स्नान करने से गर्भवती माताओं को पराक्रमी पुत्र की प्राप्ति होती है। 



इस तीर्थ पर स्नान के पश्चात दान का भी विशेष महत्व माना जाता है। अदिति वन सूर्यकुंड समिति के सचिव मोहनलाल नागपाल का कहना है कि सूर्यकुंड तीर्थ का पूरा दृष्टांत वामन पुराण में मिलता है। यह देव माता अदिति की तपोस्थली रही है और मार्तंड सूर्य की जन्मस्थली है। सूर्यकुंड तीर्थ पर अभी भी अदिति माता और ऋषि कश्यप की समाधि बनी हुई है। आज भी श्रद्धालु पूरी आस्था औऱ विश्वास के साथ अदितिवन सूर्यकुंड में स्नान व दान करने के लिए पहुंचते हैं। 



15 सितम्बर को भाद्र पद के शुक्ल पक्ष की षष्ठि को यहां विशाल मेला लगेगा। इस मेले में विशाल कुश्ती दंगल भी आकर्षण का केंद्र है।


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