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‘अंत्योदय’’ से हरियाणा उदय








Mukesh Vasist Chandigarh, 26 Sep, 2018 NewsRoots18
आज प्रखर विचारक, उत्कृष्ट संगठक और अंत्योदय के प्रेणता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 102वां जन्मदिन है। उन्होंने कहा था कि समाज में अमीरी व गरीबी के बीच की खाई दिनों दिन गहरी होती जा रही है। एक ओर जहां बहुसंख्यक लोग गरीबी, बेकारी और भुखमरी से जूझ रहे हैं तो दूसरी ओर समाज में ऐसे भी लोग हैं जिसके पास बेशुमार धन सम्पदा है। इस आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए ‘‘अंत्योदय’’ का रास्ता है। इसलिए हमें विकास की ऐसी योजनाएं बनानी होगी, जिससे समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास पहले हो। अक्तूबर 2014 में हरियाणा में पहली बार सत्ता में आई भाजपानीत मनोहर सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत पर चल रही है। आईये, जानते है 10 बडी योजनाएं, जो अंत्योदय सिद्वांत से प्रेरित है। 

प्रदेश में नौकरी पाने के लिए पूर्व सरकारों में लोगों को मोटा पैसा खर्च करना पडता था। जमीन-जायजात भी गिरवी रखनी पड जाती थी। लेकिन, मनोहर सरकार ने मेरिट और पारदर्शी तरीका अपनाकर 25 हजार युवाओं को नौकरियां दी। अब गरीब व्यक्ति का बच्चा भी सरकारी नौकरी पाने का सपना देख सकता है। 

गरीबों के राशन डकारने की अब किसी में हिम्मत नहीं है। मनोहर सरकार ने ईपीडीएस सिस्टम लागू कर आॅनलाइन तरीके से राशन बांटने का प्रक्रिया शुरू कर दी है। आज सरकार 1 करोड 8 लाख लोगों को उंगुठे का निशान लगवाकर राशन देती है। 

केन्द्र और प्रदेश सरकार अंत्योदय के सिद्धांत के चलते आवासहीनों को आशियाना दिलाने के लिए ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना’’ चला रही है। इस योजना के तहत प्रदेश में 1,33,761 परिवारों को आशियाना मुहैया कराया जा रहा है। 

सरकार द्वारा ‘‘उज्जवला योजना’’ के माध्यम से 5 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त में रसोई गैस का सिलेन्डर दिया गया है। कल तक रसोई गैस गरीब परिवारों के लिए केवल एक सपना था लेकिन वर्तमान सरकार ने इस सपने का साकार कर दिखाया है। 

हरियाणा प्रदेश कृषि प्रधान है। आज भी करीब 18 लाख परिवार कृषि क्षेत्र से जुडे है। 14 फसलों का लागत मूल्य का डेढ गुणा लाभ देने की घोषणा से आर्थिक रूप से कमजोर किसान को भी आर्थिक संपन्न बना रही है। 

6 जिलों सहित 2300 गांव को 24 घंटे बिजली देना है, जो किसी आश्चर्य से कम नहीं है। वह भी तब जब प्रदेश पानी और कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधनों से महरूम है। सरकार की सकारात्मक सोच से सिद्व हुआ है कि बिजली पर अब सिर्फ अमीर का नहीं, बल्कि गरीब किसान का अधिकार भी है।

पढे-लिखे और गरीब तबके को आगे लाने के लिए भाजपा सरकार ने पंचायती राज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की शर्त लागू की। जिसके कारण आज गांव में पढी-लिखी पंचायत है। इससे आम युवाओं को राजनीति में जाने मौका मिला। 

कांग्रेस सरकार में ट्रांसफर कराने के लिए राजनेताओं के चक्कर काटने पडते है। नेताओं की जी-हजूरी करनी पडती है। इस व्यवस्था को मनोहर सरकार ने खत्म किया। पिछले दो साल में सरकार ने 62,347 शिक्षकों का आॅनलाइन तरीके से ट्रांसफर किया। 

पहली सरकारों में बुजुर्गों को लंबी-लंबी कतारों में अपनी पेंशन लेने पडती थी। लेकिन, अब मनोहर सरकार में पास वाले बैंक  में पेंशन आती है। कोई दबंग अब गरीब की पेंशन नहीं लूट सकता। 

पहले प्रदेश के मुखिया को अपनी बात पहुंचाने के लिए आम लोगों को काफी दिक्कत होती थी। लेकिन, मनोहर सरकार की सीएम विंडो योजना के माध्यम से हर गरीब को अपनी आवाज प्रदेश के मुखिया तक पहुंचाने का अधिकार मिला है।

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