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इमरान खान पहले गिरेबान में झांकें





Chandigarh, 22 Sep, 2018 NewsRoots18
राजेन्द्र सिंह जादौन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच इसी माह के अंत में प्रस्तावित वार्ता भारत द्वारा रद्द किए जाने पर सवाल उठाए है। उन्होंने इस बारे में ट्वीट करके कहा है कि बडे पदों पर बैठे छोटे लोग बडी तस्वीर नहीं देख सकते है। इमरान इस तरह अपने को बहुत बडा साबित करने का ओछा प्रयास कर रहे है। यह ओछापन नहीं तो और क्या है? एक ओर तो पाकिस्तान की सेना व आतंकवादी ताकतें सीमा पर भारतीय सैनिकों की हत्या व बर्बरता की गतिविधियों में मशगूल है और दूसरी तरफ इमरान खान अमन-चैन के लिए वार्ता की पहल कर रहे है। बात यह नहीं है कि भारत में बडे पदों पर बैठे लोग बडी तस्वीर नहीं देख पा रहे बल्कि बात यह है कि पाकिस्तान में बनने वाली कोई भी हुकूमत अमन-चैन का सही मतलब ही नहीं जानती। इसका कारण यह है कि उनकी आंखों में बर्बरता का खून चढा हुआ है। पाकिस्तान के हुक्मरान को पहले यह बर्बरता अपनी आंखों से उतारना चाहिए। क्या इमरान खान के पास इस बात का जवाब है कि सीमा पर जो भारतीय सैनिक मारे जा रहे हैं उनका दोष क्या है? वे बेकसूर मारे जा रहे हैं। देश के बेकसूर जवानों का रक्त बहते हुए देखकर कोई भी शाति की बनवाटी पहल को नामंजूर करने को मजबूर होगा। भारत सरकार ने ऐसी हालत में पाकिस्तान के साथ कोई वार्ता न करने का सही फैसला किया है। सीमा पर पाकिस्तान की फौजों द्वारा अकारण गोलीबारी का किया जाना और इसमें भी नागरिक आबादी पर निशाना साधा जाना क्या अमन की पहल कही जायेगी? अपने देश की सीमा की निगरानी के लिए तैनात बेकसूर जवानों की हत्या किया जाना क्या कोई भी देश बर्दाश्त कर सकता है? इमरान खान को ट््वीट पर बडे बोल बोलने से पहले इस दुनिया को इन बडे सवालों के जवाब देना चाहिए। पाकिस्तान के हुक्मरान की कुटिल चालें समूची दुनिया में जगजाहिर है। जब भी भारत की ओर से शांति की पहल की जाती है तभी पाकिस्तान पीठ में छुरा घोंपने का काम करता है। बेहतर होता कि इमरान खान अपने गिरेबान में झांकते। मौजूदा प्रधानमंत्री जब अचानक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई देने पहुंच गए थे तो इसके बाद भारत में गुरदासपुर स्थित वायु सैनिक ठिकाने पर हमला किया गया। जब भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर तक बस में यात्रा  कर दोनों देशों के बीच शांति और सुलह के लिए लाहौर घोषणापत्र जारी करवाया तो भारत के करगिल क्षेत्र पर कब्जे का प्रयास किया गया। अब इमरान खान अमल की पहल करने की बात कर रहे हैं तो क्या यह समझा जाए कि पाकिस्तान में भारत के खिलाफ फिर कोई साजिश रची जा रही है? 

       भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि आतंकवाद और वार्ता दोनों एक साथ नहीं चल सकती। यदि पाकिस्तान के हुक्मरान वास्तव में अमन-चैन का वातावरण बनाना चाहते है तो उन्हें आतंकवादी घुसपैठ और सीमा पर की जाने वाली हत्या की वारदातों को तुरन्त रोकना चाहिए। इमरान खान में इस तरह का वातावरण बनाने की इच्छाशक्ति कहीं भी नहीं दिखाई देती है। इमरान खान का ट्वीट ठीक उसी तरह का है जैसा कि उनके पहले के हुक्मरानों का कुटिल रवैया बना रहा है। मुंह से वे अमन-अमन पुकारते हुए  निर्दाेषों के रक्त से अपनी प्यास ही बुझाते नजर आए है। क्या इमरान खान में यह घोषणा करने का साहस है कि सीमा पर पाकिस्तान की फौज के हाथों अब कोई भारतीय सैनिक नहीं मारा जाएगा और पाकिस्तान में मौजूद सभी आतंकवादी ठिकाने समाप्त कर दिए जायेंगे। अगर इमरान खान यह सब नहीं कर सकते तो उन्हें बडबोले ट्वीट भी बन्द कर देना चाहिए। इमरान खान ने अभी सत्ता संभाली है और आगे की उनकी राह उतनी आसान नहीं जितना कि वे समझ रहे है। क्या वे पिछले हुक्मरानों की भारत के  खिलाफ घात लगाने की रवायत को तोड पायेंगे। क्या वे ऐसा करने का प्रयास करते हुए पद पर बने रह सकेंगे? जाहिर है कि जो आका उन्हें इस पद तक लाए हैं वो उन्हें उतारते भी देर नहीं करेंगे। बहरहाल जो भी है लेकिन भारत लगातार दोनों पडौसी देशों के बीच शांति और सौहार्द की उम्मीद करता रहा है। इस उम्मीद को पूरा करने के लिए वार्ता भी की जा सकती है लेकिन इसके लिए भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान को अनुकूल वातावरण बनाना होगा। 


         भारत ने अगाध संयम का परिचय दिया है। करगिल संघर्ष के बाद भी उस समय के पाकिस्तान के सैनिक शासक जनरल परवेज मुशर्रफ को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन मुशर्रफ वार्ता को बेनतीजा छोडकर भाग निकले थे। तो क्या इमरान खान इसी रवायत को आगे बढायेंगे? वार्ता में सुलह के लिए बडे नजरिए की जरूरत होती है। मुशर्रफ निश्चित ही तंग नजरिए के शिकार होकर वार्ता को बेनतीजा छोड गए थे। भारत की ओर से न्यूयार्क में होने वाली विदेश मंत्री स्तर की वार्ता को रद्द किए जाने को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत में चुनाव की तैयारियों से भी जोडा है। दरअसल इस तरह के बयान पाकिस्तान की ओर से अपना चेहरा छिपाने के प्रयास है। सीमा पर जो कुछ घटित हो रहा है उस पर तो इमरान खान और उनके सहयोगी विदेश मंत्री ने एक शब्द नहीं कहा है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि सीमा पर भारत के जवान की बर्बर हत्या और डाक टिकट जारी कर आतंकवादी और आतंकवाद का महिमा मंडन करने के पाकिस्तान के कदमों के विरोध में वार्ता रद्द की जा रही है। भारत ने वार्ता रद्द करने के जो कारण बताए है उनका पाकिस्तान की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दोनों ही इस मामले में मौन है बल्कि दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास हमेशा की तरह करते नजर आ रहे है। 

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