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जेसी बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए फरीदाबाद ने किया स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश






Faridabad,18 Sep, News Roots 18 
 जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यायलय, वाईएमसीए फरीदाबाद, जिसने 1969 में एक डिप्लोमा काॅलेज के रूप में शुरूआत की, अपनी स्थापना के स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर लिया है। विश्वविद्यालय के 10वें संस्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को विश्वविद्यालय द्वारा संस्थान के रूप में 49 वर्ष पूरे करने पर रंगारंग समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा संस्थान के स्वर्णिम वर्ष में प्रवेश का स्वागत किया।




इस मौके पर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ले. जनरल (रि.) करन सिंह यादव मुख्य अतिथि रहे और कार्यक्रम की अध्यक्ष कुलपति प्रो. दिनेश कुमार द्वारा की गई। कुलपति ने ले. जनरल यादव को पौधा भेंट किया।
दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं से खूब समां बांधा, जिसमें नृत्य, संगीत, गायकी तथा कविता उच्चारण का मिश्रण देखने को मिला। विद्यार्थियों द्वारा कारगिल युद्ध पर आधारित एक सैनिक के जीवन की कहानी का मंचन भी किया, जिसे सभी द्वारा खूब सराहा गया।
अपने संबोधन में ले. जनरल यादव ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों को स्वर्ण जयंती वर्षोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एक संस्थान के रूप में 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहे विश्वविद्यालय के संस्थापना दिवस का हिस्सा बनना सभी के लिए गौरव की बात है, जिसने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में देश में अपनी अलग पहचान बनाई है।





ले. जनरल यादव ने विद्यार्थियों के लिए जरूरी कौशल ज्ञान पर आधारित अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत करने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को कैप्टन विक्रम ब़तरा जैसे असल जिन्दगी के नायकों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया, जिसने 1999 के कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़ते हुए साहसपूर्वक लड़ते हुए 24 वर्ष की आयु में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा सभी को विश्वविद्यालय के संस्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि संस्थापना दिवस संस्थान के लिए आत्ममंथन का दिन है। विश्वविद्यालय के लिए यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान तथा नवाचार में उच्च मानदंड तथा आयाम स्थापित करने के लिए प्रण लेने का दिन है।
 उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में नैतिक मूल्य बनाये रखने के लिए आह्वान किया तथा उन्हें रोजगार के लिए जरूरी कौशल विकास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल डिग्री लेने के लिए न पढ़े अपितु कौशल आधारित शिक्षा ग्रहण करें।



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