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राफेल का कुहासा क्यों नहीं हटाना चाहती है मोदी सरकार?





Rajendr Singh Jadon Chandigarh, 23 Sep, 2018 NewsRoots18
भारत देश अब आम चुनावों के करीब खडा है। देश की नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपने तरीके से देश में कुछ नए काम किए है। इन सभी कामों को गरीब हितैषी बताया जा रहा है। आम चुनावों में इन कामों की वास्तविकता की परीक्षा हो जायेगी। लेकिन मोदी सरकार द्वारा जनहितैषी समझे जाने वाले सभी कामों मसलन 23 सितम्बर को रांची से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना पर राफेल जेट विमान सौदे में मोदी सरकार द्वारा कथित तौर पर किए गए 41 हजार करोड के घोटाले के आरोपों का कुहासा छाया हुआ है। यह कुहासा निश्चय ही लोगों को सही ढंग से मोदी सरकार   द्वारा किए गए जनहितैषी कार्यों को नहीं देखने देगा। समझ से बाहर है कि चुनाव करीब होते हुए भी मोदी सरकार इस कुहासे को क्यों नहीं हटाना चाहती है? कांग्रेस अध्यक्ष लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर इस कुहासे के बीच से तीर छोड रहे है। उन्होंने मोदी को चोर कहने तक से परहेज नहीं किया। राहुल की जुबान से जब चोर कहने वाला तीर छूट गया तब मोदी के वरिष्ठ सहयोगी केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस तीर को भोंथरा करने का प्रयास किया। 


जेटली ने कहा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांक्वा ओलांद का वह बयान सुनियोजित रूप से गढा गया है जिसके अनुसार उन्होंने कहा कि भारत को राफेल विमान की आपूर्ति करने वाली फ्रांस की कम्पनी डाॅसाॅल्ट की सहयोगी कम्पनी के रूप में रिलायंस डिफेंस को भारत सरकार ने ही प्रस्तावित किया था। जेटली ने ओलांद के इस बयान को इस आधार पर गढा होना साबित करने का प्रयास किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इससे पहले ही कहा था कि पेरिस में बडे बम फूटने वाले है। जेटली के अनुसार राहुल गांधी को पहले से ही कैसे पता था कि ओलांद यह खुलासा करने वाले है। जेटली इससे पहले भी राहुल गांधी के राफेल विमान सौदे में घोटाले के आरोप को इस आधार पर खारिज कर चुके हैं कि वे यूपीए सरकार के समय प्रस्तावित राफेल विमान सौदे में एक विमान की कीमत अलग-अलग बता रहे है। 


ओलांद के बयान की सच्चाई को इस आधार पर भी चुनौती दी जा रही है कि स्थिति साफ नहीं है कि इस मुद्दे पर ओलांद का साक्षात्कार कब और कहां लिया गया। बताया जा रहा है कि ओलांद का यह बयान फ्रांस की न्यूज पोर्टल मीडिया पार्ट पर दिखाया गया है। यह बयान घडा गया भी हो सकता है। लेकिन इस मामले में कुछ तथ्य और भी आए है कि रिलायंस डिफेंस के मालिक अनिल अम्बानी ने  ओलांद   की अभिनेत्री प्रेमिका जूली गाए की फिल्म आल इन द स्काई के निर्माण में पैसा लगाया। आखिर रिलायंस ने यह दरियादिली क्यों दिखाई? एक और दलील यह दी जा रही है कि रिलायंस को भारत सरकार की ओर से प्रस्तावित करने का काम यूपीए शासनकाल में किया गया था। विमान सौदा यूपीए शासन में ही प्रस्तावित किया गया था। बहरहाल राफेल विमान सौदे में घोटाले के आरोप और उनको खारिज करने के लिए दिए जा रहे तर्कों ने तथ्यों के बजाय एक कुहासे का रूप ले लिया है और इस कुहासे को हटाने की जिम्मेदारी मोदी सरकार की ही है। मोदी को अपने आप को प्रधान चैकीदार साबित करना है। उन्हें आंख खोलकर चुनाव मैदान में उतरना चाहिए। 

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