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आगामी शैक्षिण सत्र से हॉयर एजुकेशन पाठयक्रम में मानवीय मुल्यों का समावेश




Panchkula, 16 Sep, 2018 NewsRoots18
हरियाणा के महाविद्यालयों में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में जीविकोपार्जन के व्यावहारिक उपायों का समावेश अगले शैक्षणिक सत्र से शुरु होगा। यह जानकारी हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो॰ बृज किशोर कुठियाला ने पंचकूला में आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यशाला के दौरान दी। 

स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों में जीविका उपार्जन के व्यावहारिक पक्ष एवं मानवीय मूल्यों का समावेश करने के उपायों पर व्यापक विमर्श के लिए   दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की अध्यक्षता हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष व शिक्षाविद् प्रो॰ बृज किशोर कुठियाला ने की। कार्यशाला में प्रदेश के सात विश्वविद्यालयों के कुलपतियों सहित 25 विषयों के 28 विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की।


 
प्रो॰ कुठियाला ने बताया कि कार्यशालाा का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को पाठ्यक्रम में जीविका उपार्जन एवं जीवन मूल्यों के समावेश के महत्व के प्रति जागरूक करना था। इसके अलावा प्रत्येक विषय में ऐसे व्यावहारिक उपाय खोजने के लिए प्रेरित करना था जिसमें स्नातक स्तर के विद्यार्थी जीविका उपार्जन के कार्य करने में समर्थ हों व एक आदर्श नागरिक भी बन सकें। इस कार्यशाला में 26 प्राध्यापकों व 6 कुलपतियों ने भाग लिया।


उन्होंने बताया कि परिषद का उद्देश्य युवाओं को इतना सक्षम बनाना है कि वह शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ जीविकोपार्जन के लिये व्यावसायिक मूल्यों को भी शैक्षणिक संस्थाओं में ग्रहण कर सकें।



कार्यशाला के संयोजक प्रो॰ वज़ीर नेहरा ने जानकारी दी कि इन विषयों के विशेषज्ञों से आग्रह किया गया है कि वे पाठ्येतर गतिविधियों के साथ-साथ ऐसे व्यावहारिक सुझाव भी आगामी एक माह में मांगे गए है जिससे तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार इन विषयों में जीविकोपार्जन के समुचित उपायों का समावेश किया जा सके।

दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल के कुलपति प्रो॰ राजेन्द्र कुमार अनायत ने बताया कि हर 3-4 वर्ष पश्चात पाठ्यक्रमों में पच्चीस प्रतिशत बदलाव भी किया जाना चाहिए ताकि उन्हें काॅर्पोरेट सैक्टर की जरूरतों के अनुसार बनाया जा सके। वही हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, गुरूम्राम के कुलपति राज नेहरू ने सुझाया कि स्नातक स्तर तक प्रत्येक वर्ष में विद्यार्थियों के कौशल को देखते हुए उन्हें प्रत्येक वर्ष सर्टिफिकेट प्रदान करने की प्रणाली विकसित की जाए।

JC BOSE YMCA विश्वविद्यालय, फरीदाबाद के कुलपति प्रो॰ दिनेश कुमार, चैधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलपति प्रो॰ राजबीर सिंह सोलंकी, राज्य विश्वविद्यालय एवं दृश्य कला, रोहतक के कुलपति प्रो॰ राजबीर सिंह, चैधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी के कुलपति प्रो॰ आर॰ के॰ मितल एवं जगन नाथ विश्वविद्यालय, बहादुरगढ़ के कुलपति प्रो॰ एच॰ एल॰ वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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