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विधानसभा स्पीकर को सुप्रीमकोर्ट का नोटिस







Delhi,21 Sep,2018  NewsRoots18
हरियाणा विधानसभा स्पीकर कंवरपाल गुर्जर के पूर्व निजी सचिव वकील सिंह के वीडियो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कंवरपाल गुर्जर, मुख्य सचिव और स्टेट विजिलेंस को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, कोर्ट ने वकील सिंह और सीबीआई को भी नोटिस भेजा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस वकील वेद प्रकाश महला की याचिका पर जारी किया है। इस मामले में 12 नवंबर को सुनवाई होगी। स्पीकर कंवरपाल गुर्जर के निजी सचिव रहे वकील सिंह पर नौकरी के नाम पर पैसे लेने का आरोप है। 

गौरतलब है कि साल 2014 में स्पीकर कंवरपाल गुर्जर के प्राइवेट सेक्रेटरी रहे वकील सिंह का एक ऑडियो और वीडियो जारी हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि वकील सिंह नौकरी के नाम पर पैसे ले रहा है। याचिकाकर्ता वेद प्रकाश महला की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जो सीबीआई ही कर सकती है। इस विवाद के बाद से वकील सिंह को स्पीकर के प्राइवेट सेक्रेटरी पद से हटा दिया गया था।

यह है वेद प्रकाश और वकील सिंह का कनेक्शन:-
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कंवरपाल गुर्जर और उनके सचिव पर नियमों को दरकिनार करके अपने चहेते को चार महीने में चार बार प्रमोशन देने के आरोप लगे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए स्पीकर,आरोपी वकील सिंह, मुख्य सचिव और विधानसभा सचिव को नोटिस जारी कर सात अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। 

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर और इनके सचिव पर आरोप है कि विधानसभा में कार्यरत एक टेलिफोन ऑपरेटर वकील सिंह चौधरी पर स्पीकर साहब ज्यादा ही मेहरबान हैं  इसके चलते नियमों को ताक पर रखते हुए स्पीकर के कहने पर वकील सिंह चौधरी को चार महीने में एक-दो बार नहीं बल्कि चार बार प्रमोशन दे दिया गया।वकील चौधरी को टेलिफोन ऑपरेटर से स्पीकर का लाइजनिंग ऑफिसर और सचिव बना दिया गया।

शिकायतकर्ता ने पीएमओ में की शिकायत
जब मामले में शिकायतकर्ता वेदप्रकाश ने इस संबंध में पीएमओ कार्यालय में शिकायत की तो वकील सिंह को विधानसभा से हटाकर और भी अच्छे ओहदे पर बैठा दिया गया।
वहीं वकील सिंह चौधरी को एमएलए हॉस्टल की निर्माणाधीन बिल्डिंग की निगरानी का जिम्मा भी सौंप दिया गया।

 शिकायतकर्ता वेदप्रकाश ने बताया कि कैसे वकील सिंह चौधरी को 4 नवम्बर 2014 टेलीफोन ऑपरेटर से स्पीकर ब्रांच का सचिव और 4 फरवरी 2015 को टेलिफोन ऑपरेटर के वेतनमान को क्लास दो के वेतनमान में तब्दील करते हुए कार्यकारी कमेटी ऑफिसर बना दिया गया। इसके बाद 25 मार्च 2015 को उसे कमेटी ऑफिसर के साथ-साथ स्पीकर का सचिव बना दिया गया।  27 मार्च 2015 सिर्फ दो दिन बाद ही सचिव और कमेटी ऑफिसर से लाइजनिंग ऑफिसर बना दिया गया। 1 अप्रैल 2015 चार दिन बाद ही लाइजनिंग ऑफिसर के अलावा स्पीकर के निजी सचिव के रूप में तैनाती कर दी और सभी वीवीआईपी इंतजामों की देखरेख का जिम्मा सौंप दिया गया।  8 अप्रैल 2015 को सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का हवाला देते हुए वकील सिंह का वेतनमान और बढ़ा दिया गया।  


वहीं 9 दिसंबर 2015 को उपरोक्त गैरकानूनी पदोन्नतियों के सार्वजानिक होने के बाद वकील सिंह को विधानसभा से हटाकर नई बन रही एमएलए हॉस्टल बिल्डिंग की देखरेख का जिम्मा सौंप दिया गया।   शिकायतकर्ता वेदप्रकाश ने आरोप लगाया कि वकील सिंह चौधरी पर स्पीकर साहब का विशेष आशीर्वाद मिला हुआ है। जिसके चलते वह रिश्वतखोरी कर मोटी कमाई कर रहा है।  वेदप्रकाश ने यह भी आरोप लगाया है कि वकील सिंह चौधरी ने उनकी एक फाइल क्लियर करने के एवज में दो लाख रुपए लिए थे और पैसे जमा होते ही फाइल आगे बढ़ा दी पर ऑर्डर करवाने के बदले में पंद्रह लाख की मांग की जो वो नहीं दे पाया।  

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