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देसी नस्ल की गाय ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड




Hisar, 07 Oct,2018 NewsRoots18
भारत में दुग्ध व्यव्साय लाखों लोगों को रोजगार देता है। इसमें ऐसे पशुओं की मांग ज्यादा रहती है जो ज्यादा दूध देती हैं। एेसे में लोग ज्यादा दूध के लिए विदेशी नस्ल की गाय को ज्यादा तवज्जो देते हैं, लेकिन अब तकनीक के प्रयोग से देसी नस्ल की गाय भी विदेशी नस्ल की गायों को मात दे रही है। लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार के पशु अनुवांशिक एवं प्रजनन विभाग की हरियाणा नस्ल की गाय ने 20.6 किलोग्राम दूध देकर इस तरह की देसी नस्ल की गाय में राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया है।

जब कभी चर्चा होती है तो हरियाणा का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। यहां के नस्ल की गाय अधिकतम 10 से 12 किलोग्राम ही दूध दे पाती हैं। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं उनकी टीम को पशुओं के बेहतर रखरखाव के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति ने उन्हें बधाई दी। बता दें कि पिछले वर्ष लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में  इस पशु प्रजनन एवं अनुवांशिक विज्ञान विभाग को भारत सरकार ने देसी नस्ल की गायों मे सुधार के लिए उत्कृष्ट योगदान देने के लिए राष्ट्रीय कामधेनू पुरस्कार से नवाजा गया था।

लगातार पांच दिन दिया 19.8 लीटर से ज्यादा दूध

 कुलपति डा. गुरदियाल सिंह ने बताया कि इस देसी नस्ल की हरियाणा गाय ने अपने चौथे ब्यांत में लगातार पांच दिन 19.8 किलोग्राम से ज्यादा दूध देकर अपनी श्रेणी में नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया है। इस गाय ने अपने पिछले ब्यांत में 17.2 किलोग्राम अधिकतम दूध देकर कुल ब्यांत काल में 3281.4 किलोग्राम दूध दिया था। इस गाय ने 25 दिन पहले बछड़े को जन्म दिया था। शनिवार को इसने 20 किलो 600 ग्राम दूध देकर राष्ट्रीय रिकार्ड बना दिया। इससे पहले महेंद्रगढ़ जिले में हरियाणा नस्ल की एक गाय ने 18.5 किलोग्राम और कैथल में एक किसान की इसी नस्ल की गाय ने 19 किलो दूध देकर राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया था।

देसी गाय की विशेषताएं

कम से कम बीमार होती है, यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है। 
45 डिग्री से अधिक तापमान पर भी गाय को बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ता।
सूखा चारा खाकर भी यह गाय स्वयं के साथ दूध की मात्रा को मेंटेन रख सकती है।
अधिक गर्मी में इसका दूध बढऩे लगता है, जबकि अन्य का घटता है।
पहले अच्छे बैल लेने के लिए इस गाय को रखा जाता था, अब ए टू दूध के कारण।

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