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फतेहपुर सीकरी में देखिए इतिहास का ‘खजाना’, डेढ़ साल बाद फिर खुला म्यूजियम





Parvinder Rajput, Agra, 13 Oct,2018 NewsRoots18     
आगरा फतेहपुर सीकरी के खजाना महल में बनाए गए म्यूजियम में पर्यटक इतिहास का खजाना देख सकेंगे। डेढ़ साल से बंद चल रहे इस म्यूजियम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने फिर से पर्यटकों के लिए चालू कर दिया। इस म्यूजियम में सैकड़ों साल पहले के पुरावशेष, सिक्के, मूर्तियां और अन्य वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। वीर छबीली टीले के उत्खनन में मिली 1010 ई. की जैन सरस्वती प्रतिमा यहां आकर्षण का केंद्र है।

2014 में तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद् एनके पाठक ने फतेहपुर सीकरी में टकसाल के सामने खजाना महल में म्यूजियम का उद्घाटन किया था। मार्च 2017 में यह बंद कर दिया गया। डेढ़ साल बाद अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार के निर्देश पर म्यूजियम को आम पर्यटकों के लिए खोला गया। सहायक पुरातत्वविद प्रदीप चंद पांडेय को इस म्यूजियम की जिम्मेदारी दी गई है। विदेशी पर्यटकों के दल ने  म्यूजियम में मौजूद पुरावशेष देखे तो वो रोमांचित हो उठे। पहले दिन कई पर्यटकों ने म्यूजिम देखा। 

1572 में सीकरी बनी थी राजधानीमुगलों के पहले योजनाबद्ध शहर फतेहपुर सीकरी में हजारों सालों का इतिहास दबा है। 1976 और 1999 में दो बार यहां उत्खनन किया गया। तब यहां एक हजार साल पहले की जैन मूर्तियां मिलीं थीं। इनमें वीर छबीली टीले से प्राप्त जैन श्रुत देवी सरस्वती, यक्षी अंबिका, प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ, तृतीय जैन तीर्थंकर संभवनाथ की कई मुद्राओं में प्रतिमाएं मिलीं थीं, जिन्हें म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा रसूलपुर, हाडा महल केपास उत्खनन में मिले धूसर मृदभांड, गैरिक मृदभांड और कुषाण काल के मृदभांड, लोहे की कुल्हाड़ी, तांबे की घंटी, कटोरा आदि प्रदर्शित हैं।

अधीक्षण पुरातत्वविद् वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि फतेहपुर सीकरी म्यूजियम में प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है। शुक्रवार को यह बंद रहेगा। मिनी ऑडिटोरियम में जल्द ही सीकरी के बौद्ध, जैन तथा मुगलकालीन इतिहास की जानकारी वीडियो के जरिए दी जाएगी।

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