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​​केए​​लपी कॉलेज रेवाड़ी के प्राध्यापकों की भूख हड़ताल





Jyoti Bhatia,Rewari, 06 Oct,2018 NewsRoots18
केएलपी कालेज रेवाड़ी के प्राध्यापक पिछले चार दिनों से मैनेजमेंट के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे है। कॉलेज प्राध्यापको का आरोप है कि मैनेजमेंट द्वारा हिटलरशाही तरीके तथा  सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सिनीयरिटी सूची में नौवे स्थान पर आने वाले प्राध्यापक को कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किया गया है।जिसके विरोध में कॉलेज प्रान्गण में सारा स्टाफ भूख हड़ताल पर बैठा हैं। आपको बता दें कि कार्यवाहक प्रधानाचार्य, डॉ अभय सिंह, रसायन विज्ञान में एसोसिएट प्रोफेसर एवम बरसर का कार्य भी सम्भाले हुए थे। इससे साफ झलकता है कि आर्थिक मामलों में वर्तमान प्राचार्य ने प्रबंधन के लिए लाभकारी कार्य किए होन्गे। प्रबन्धन ने उन्हें उनके इन्हीं कार्यों के लिए पुरस्कृत किया है।


केएलपी कालेज प्रबंधन समिति द्वारा सरकार एवम् एमडीयू द्वारा समय समय पर जारी आदेशों का खुल्लमखुल्ला उल्लन्घन है (पत्र संख्या 2/1 हरियाणा के प्रिंसिपल की नियुक्ति के संबंध में निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, पंचकुला (एचआर) द्वारा जारी -2004 सी चतुर्थ (3) दिनांक 2/7/2004 और केडब्ल्यू 7 / 18-2009 सीआईवी (3) दिनांक 4/8/2016)।

प्रबन्धन के तानाशाही रवैये का ये एक और नया मामला सामने आया है। प्रबन्धन ईस तरह के निर्णय आमतौर पर लती रहती हैं जो सरासर न केवल अध्यापक विरोधी है बल्कि छात्र विरोधी भी है। इस तरह की गतिविधियों से आपस में अविश्वास पनपता है जो किसी के भी हक में नहीं है। द्वारा आपसे अनुरोध है कि वे कालेज टीचर्स एशोसिएशन के प्रधान डॉ राजबीर सिंह ने प्रबन्धन के इस हिटलरशाही निर्णय कीघोर निंदा की तथा इसको तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने सरकार से इस मामले के तुरन्त  समाधान हेतू दृढ़ कार्रवाई करने और इस मामले को देखने के लिए एक जांच समिति स्थापित करने की मांग की ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। 

डाँ राजबीर सिहँ ने प्रबंधन के इस तरह के तानाशाही रवैये के चलते सरकारी सहायता प्राप्त महाविधालयो के स्टाफ के टेक ओवर की मांग को उचित ठहराया और कहा कि सरकार को जल्द से जल्द एडिड कालेजो के स्टाफ को टेक ओवर करके  मैनेजमेंट के बेलगाम एवम हिटलरशाही रवैये से निजात दिलाए। डाँ राजबीर सिहँ ने सरकार को याद दिलाया कि टेक ओवर का मामला 2014 के बीजेपी के घोषणा पत्र का अहम हिस्सा था जो उसे नैतिक आधार पर पुरा करना चाहिए। अध्यापकों की गरिमा को बचाने के लिए टेक ओवर होना अति आवश्यक हो गया है।

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