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माँ कुष्मांडा ने ही ब्रह्मांड की रचना की​






Chandigarh, 13 Oct,2018 NewsRoots18
​नवरात्रों के पावन पर्व पर आज हम उपासना कर रहे हैं मां कूष्माण्डा देवी की। कहते हैं कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं थाए तब मां कुष्मांडा ने ही ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिये मां कुष्मांडा को सृष्टि की आदि.स्वरूपा और आदिशक्ति भी कहा जाता है। देवी कूष्माण्डा का निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतरी लोक में माना जाता हैए जहां निवास करने की क्षमता और शक्ति केवल मां कुष्मांडा में ही है। 

मां के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित होती हैं। माँ कूष्माण्डा की आठ भुजाएं हैंए इसलिये मां को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। मां के सात हाथों में क्रमशः कमंडलए धनुषए बाणए कमल.पुष्पए अमृतपूर्ण कलशए चक्र और गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है। भक्त जन दहीए हलवाए फलए सूखे मेवे और सुहागिनें सौभाग्य का सामान मां को भेंट कर प्रसन्‍न करती हैं। वहीं पूजन के समय लाल गुलाब मां को चढ़ाना और मालपूये का भोग लागाने से भक्तों को रोगों से निजातए दीर्घजीवनए प्रसिद्धि और शोहरत के साथ तेज बुद्धि का आर्शिवाद प्राप्‍त होता है।

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