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क्यों रोए शहीदों के माँ-बाप






Chandigarh, 08 Oct,2018 NewsRoots18
जिनके जवान बेटे वतन की हिफाजत करते हुए सरहद पर शहीद हो गए, वो आज सम्मान औऱ हकों की लड़ाई लड़ते हुए हारने लगे हैं। न सरकार उनकी सुन रही औऱ न ही सेना। अब शहीदों के परिजनों ने मजबूरन अनशन शुरू करने का एलान कर दिया है। मांगें पूरी नही हुई तो शहीदों के परिवार 1 नवम्बर से अनशन करेंगे। यहाँ तक कि उन्होंने शहीदों के मेडल औऱ वर्दियां तक नीलाम करने की घोषणा कर दी है। 




ये डबडबाई आंखें... और इनसे झरते आंसू शहादत के बाद के दुखों का हस्र हैं। बेटों को बहादुर बनाने वाले मां-बाप अब खुद कमजोर पड़ने लगे हैं।  शहीदों के परिजन विडम्बनाओं के आगे घुटने टेकने को मजबूर हैं। जवान बेटे चले गए, लेकिन मां-बाप को न सम्मान मिला औऱ न ही पेंशन! यहां तक कि वीरांगना बहुएं भी उन्हें छोड़ कर चली गई। अपने शहीद बेटों की आखिरी निशानी पोते-पोतियों से मिलने के लिए भी अदालत में केस लड़ना पड़ रहा है। आप खुद ही सुनिए शहीदों के परिजनों की दर्द भरी दास्तां...





शहीदों के परिजनों का कहना है कि क्या शहादत किसी मेडल से छोटी होती है? जब देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ी को गोल्ड मेडल आने पर 6 करोड रुपए दिए जा सकते हैं तो एक शहीद की शहादत पर 6 करोड़ क्यों नहीं? सबसे बड़ी समस्या है वीरांगनाओं का शहादत के बेनिफिट लेकर चले जाना या पुनर्विवाह कर लेना। इस पर शहीदों के परिजन सवाल उठाते हैं कि जो मां बाप पाल पोस कर बेटे को बड़ा करते हैं बहादुरी का पाठ पढ़ाते हैं और बेटा देश के काम आ जाए लेकिन मां-बाप दर दर की ठोकरें खाते हैं। लिहाजा उनकी सबसे बड़ी मांग है कि सरकार जो पैसा शहादत पर देती है उस में सेना और केंद्र की तरफ से मिलने वाले पैसे में माता-पिता का भी हिस्सा होना चाहिए। साथ ही पेंशन का हिस्सा भी मां-बाप को मिलना चाहिए। 



हालांकि हरियाणा सरकार ने कंपनसेशन में माता-पिता और वीरांगना का हिस्सा तय कर रखा है। वॉइस ऑफ मार्टियर के अध्यक्ष वीके सांगवान का कहना है कि उनकी कुल मिलाकर 11 मांगे हैं इन के लिए कई बार मुख्यमंत्री से समय मांग चुके हैं पिछली सरकार के दौरान भी समय मांगा गया था ना तो राज्य सरकारों ने समय दिया और ना ही वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री की तरफ से ही उन्हें समय मिल पाया। अब यदि 1 नवंबर तक शहीदों के परिजनों को मिलने का वक्त नहीं मिला और उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे अनशन पर बैठ जाएंगे उनके सांगवान बताते हैं कि कुल 23000 शहीदों के परिवार इन मांगों पर एकजुट है। 

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