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क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, राजनीति में भी प्रेडिक्शन फेल है। - हरियाणा राजनीति पर विशेष


Chandigarh,09March2019 NewsRoots18
हरियाणा के पूर्व परिवहन मंत्री और इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की है। मुलाकात सियासतदानों के बीच हुई है तो इस मुलाकात के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं और निकालने लाजमी भी है। इनेलो के दो फाड़ होने और चौटाला परिवार में बिखराव से पहले भी राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा जोरो पर थी कि अशोक अरोड़ा भाजपा में शामिल हो सकते है। हालांकि इनेलो पार्टी और चौटाला परिवार में बिखराव ने इन चर्चाओं को आराम दे दिया था।

बदली राजनीति
जींद उपचुनाव में इनेलो की शर्मनाक हार, कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेलने में जेजेपी की कामयाबी और राजकुमार सैनी के वोट कटर साबित होने के बाद प्रदेश की राजनीति काफी हद तक बदल चुकी है।


अरोड़ा की सीएम से मुलाकात के मायने
अरोड़ा की सीएम से हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चा गर्म कर दी है इस बार अरोड़ा के भाजपा में शामिल होने से लेकर इनेलो के भाजपा की सहयोगी पार्टी बनने तक की चर्चा जोरों पर है। क्योंकि इनेलो में बिखराव से जींद में मिली करारी हार के बाद बसपा जैसे दल ने भी इनेलो का चश्मा उतार राजकुमार सैनी की एल एस पी से नाता जोड़ लिया है। इसपर राजनीतिक टिप्पणी की जाए तो यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि बसपा भी इनेलो को अपने लेवल का दल नहीं समझता है। हांलाकि सदन में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ नेता अभय चौटाला आज भी इंडियन नेशनल लोकदल को मजबूत करने में जुटे है और लोकसभा में दम दिखाने का दम भरते है।

भाजपा के हौंसले सातवें आसमान पर
पांच नगर निगम और जींद उपचुनाव जीतने के बाद भाजपा के हौंसले सातवें आसमान पर है। ऐसे में राजनीतिक पंडित भाजपा इनेलो से गठबंधन करेगी इसे सिरे से नकार रहे है। हालांकि दूसी चर्चा में जरूर दम खम दिखता है। क्योंकि कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी भाजपा से विधरोह कर चुके है। ऐसे में अशोक अरोड़ा भाजपा में शामिल होते है तो उन्हें भाजपा कुरुक्षेत्र से मैदान में उतार सकती है। हालांकि सैनी को सैनी से रिप्लेस करने के लिए भाजपा राज्य मंत्री नायाब सैनी और लाडवा से विधायक पवन सैनी पर भी विचार कर रही है।

क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है वैसे ही राजनीति में भी प्रेडिक्शन फेल है।
हरियाणा में आये दिन ये भी चर्चा जोरो पर रहती है कि लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी होंगे। इसका हवाला भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मुलाकात से ज्यादा था। लेकिन ये साफ हो चुका है कि विधानसभा के चुनाव समय पर ही होंगे। भाजपा के लिए सबसे पहले 10 लोकसभा सीट जीत कर नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाना है। वहीं चाचा के लिये भतीजे को सबक सिखाना प्रथमिकता है। ऐसे में राजनीति में कुछ भी संभव है। इनेलो और भाजपा लोकसभा के लिए अंदरूनी समझौता भी कर सकती है कि इनेलो लोकसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी ही न उतारे और बीजेपी का समर्थन करे। जिससे भाजपा दस की दस सीटे जीत जाये और भतीजे को भी सबक मिल जाए। वैसे क्रिकेट और राजनीति में प्रेडिक्शन फेल है।


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