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लोकतंत्र के महारण में राम रहीम किस के ?, डेरे को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब का भी फरमान जारी

                                        सांकेतिक फोटो 

Chandigarh,22March2019 NewsRoots18
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के महारण के आगाज को आज 13 दिन हो गये है। तमाम राजनीतिक दल अपनी ताकत बढाने में जुटे है। कांग्रेस अपनी गुटबाजी को खत्म कर समन्वय कायम करने में लगी तो हाल ही में अस्तित्व में आई जन नायक जनता पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में चुटी हुई है। हरियाणा में राजनीतिक जमीन बनाने के लिये आप जहां साथी तलास रही है वहीं मुख्य विपक्षी दल अपने बल को बचाने के लिये जगदोजहद कर रहा है। सत्ता धारी भाजपा भी हरियाणा की सभी दस सीटों पर क्लीन स्वीप करने के लिये अन्य दलों को विधायकों,पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों व नेताओं को सत्ता का स्वाद चखवाने में लगी हुई है। लेकिन इस सभी राजनीतिक दलों ने डेरे से दूरी बनाई हुई है। हांलाकि सूत्रों का कहना है कि डेरे के रसूकदार लोगों के सम्पर्क में  राजनीतिक दल जरुर है ताकि खुले तोर पर ना सही अंदर खाते ही सही डेरा सर्थकों का वोट उनको मिल सके।

हरियाणा के सियासतदान  बाबा के दरबार में
हरियाणा के भी तमाम राजनीतिक दल और राजनीतिक घराने सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में हाजरी लगाते रहे है। इनेलो के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा हो या वर्तामान में भाजपा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल या मनोहर के मंत्री हो सभी गुरमीत राम रहीम का आशिर्वाद लेते रहे है। ना सिर्फ आशिर्वाद लेते रहे है सरकारी खजाने से डेरे में चलने वाली खेल, स्वास्थय या अन्य तरह की गतिवीधियों के लिये पैसा भी देते रहे है। राम रहीम का डेरा भी हरियाणा के सिरसा जिलें में स्थित है तो हरियाणा में डेरे का प्रभाव अधिक होना भी लाजमी है। अखबारों की रिपोर्टस के मुताबिक वर्ष 2014 में लोकसाभ में भाजपा को सात सीट और विधानसभा में पूर्ण बहुमत की सरकार  बाबा के ही आशिर्वाद से बनी थी।

पंजाब के सियासतदान  बाबा के दरबार में 
2019 के महारण में हर वो सियासी दांवपेंच चले जा रहे है जो सियासत को कहीं अधीक सियासी बनाते है। लेकिन इन दांव पेचों के बीच विशेषकर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की कुछ सीटों पर प्रभावी और साध्वी यौन शोषण मामले में सजा काट रहे बाबा राम रहीम को सब भूले हुये है।  हांलाकि राम रहीम की सजा से पहले तमाम सियासी घराने और राजनीतिक दल बाबा का राजनीतिक आशिर्वाद पाने के लिये दरबार में हाजरी लगाते रहे है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल हो या मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह हो बराबर समय - समय पर डेरे से आशिर्वाद लेते रहे है। डेरे का आशिर्वाद ले भी क्यों ना पंजाब के 13 जिलों में सीधा - सीधा प्रभाव माना जाता है। कहते पंजाब के इन 13 जिलों के 65 हल्कों में उस पार्टी को ही बढत मिलती है जिसे राम रहीम का आशिर्वाद मिलता है।

डेरे का प्रभाव कम हुआ खत्म नहीं 
डेरा सच्चा सौदा और राजनीति का नाता काफी पुराना है। 1972 से ही तमाम राजनेता बाबा के दरबार में जाते रहे है बाब भी बखूबी आशिर्वाद देते रहे है। कांग्रेस नेता ज्ञानी जैल सिंह ने डेरे में जाना शुरु किया। जिसको बाबा ने आशिर्वाद दिया वो मुख्यमंत्री बना और डेरा का हो चला। 2002 में कैप्टन अमेन्द्र सिंह मुख्यमंत्री बने और बाबा के हो गये। 2007 में प्रकाश सिंह बादल को आशिर्वाद मिला वो मुख्यंत्री बने और डेरे के हो गये। बाबा का राजनीति नाता इतना गैहरा होता चला गया कि बाबा ने अपने बेटे जसमीत की शादी कांग्रेस के नेता हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी से कर दी। यही हाल हरियाणा के नेताओं का रहा ओमप्राकश चौटाला मुख्यंत्री बने वो डेरे के हो गये। हुड्डा सीएम बने डेरे के आशिर्वाद से यहां तक की बाबा को जेल के सलाखों के पीछे धकेलने वाले मनोहर लाल खट्टर भी बाबा के ही आशिर्वाद से मुख्यमंत्री बने है। साध्वी यौन शोषण और राम चंद्र छत्रपति हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम को सजा के बाद और सजा के ऐलान से हुई हिंसा के बाद डेरे का प्रभाव कम हुआ है लेकिन खत्म नहीं हुआ है। डेरे का स्कूल और अस्पताल सरकारी की निगरानी में चल रहा है। वहीं डेरे की तमाम गतिवीधियां डेरे की मनेजमैंट कमेटी चला रही है जिसकों बाबा की खास बिपासना डील करती है। डेरा समर्थक अब भी डेरे में नामचर्चा के लिये नियमित आते है।

श्री अकाल तख्त साहिब का फरमान
2019 के लोकसभा चुनाव के मद्दे नजर श्री अकाल तख्त साहिब ने सभी जानीतिक दलों को फरमान जारी किया है। फरमान में सभी दलों को डेरा सच्चा सौदा से दुरी बनाये रखने की चेतावनी दी गई है। फरमान में कहा गया है कि कोई भी राजनीतिक दल डेरा सच्चा सौदा से किसी भी तरह का राजनीतिक और सामाजिक संबंध न रखे।

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