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ऐसे तो सपना ही बन जायेंगे स्मार्ट सिटी


Chandigarh,27March2019 NesRoots18
देश को 100 चुनिन्दा शहरों को स्मार्ट बनाने की क्वयद जिस स्मार्ट तरीके से शुरु की गई थी अब यह मुहिम रामभरोसे हो चली है। राम भरोसे इस लिये क्योंकि केन्द्र सरकार को अपने इस स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की खुद ही जानकारी नहीं है। पीएम मोदी के खास प्रोजेक्टों में से एक प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी बनाने का था लेकिन अब यह प्रोजेक्ट खास तो दूर आम भी नहीं रहा है। देश के 100 सिटीज को स्मार्ट बनाने के लिये इस प्रोजेक्ट के लिये कुल 2,03,172 करोड़ रूपये निर्धारित किये गये थे। लेकिन आपको जनकर हैरानी होगी कि बीते चार वर्षों में कुल लागत का मात्र सात फिसदी यानी 14882 कोरड़ रूपया ही खर्च किया गया है। इतना ही नहीं आरटीआई कार्यकर्ता पी पी कपूर को आर टी आई में मिली जानकारी में यह खुलासा हुआ कि केन्द्र सरकार को अपने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत चल रहे कार्यों तक की भी जानकारी नहीं है। ऐसे में स्मार्ट सिटी मिशन अगले पचास साल तक भी पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।



भारत सरकार को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के स्टेट्स की नहीं कोई जानकारी
देशभर में चल रहे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने अबतक कुल 14,882 करोड़ रूपये राज्यों व केन्द्र शासित राज्यों को दिये है। लेकिन केन्द्र सरकार नहीं जानती कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दी गई राशि से कौन से कार्य प्रगति पर है भी या नहीं । इन स्मार्ट सिटीज की नवनीतम स्थिति बारे आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (स्मार्ट सिटीज-1 प्रभाग) के केन्द्रीय जनसूचना अधिकारी संजय शर्मा ने आरटीआई के तहत  जनवरी 2019 में बताया कि यह सूचना सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। 



इन दस स्मार्ट सिटीज को मिले चार वर्षों में दो - दो करोड़
केन्द्र सरकार के समार्च सिटी प्रोजेक्ट के तहत इन दस सिटीज को स्मार्ट बनाने के लिये महज दो - दो करोड़ रुपये ही मिले है। दो करोड़ मिलने वालों में शिलांग(मेघालय), डिंडिगुल(तमिलनाडू), अमरावती व ग्रेटर मुम्बई (महाराष्ट्र), गाजियाबाद, मेरठ/रायबरेली, रामपुर (यूपी), पश्चिमी बंगाल के दुर्गापुर, हल्दिया व विधाननगर शामिल।

मोदी के संसदीय क्षेत्र स्मार्ट सिटी वाराणसी की स्थिति
प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये 2267.62 करोड़ रूपये की लागत से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तैयार किया गया। लेकिन समर्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत वाराणसी को केन्द्र सरकार से पिछले चार वर्षों में कुल बजट का 8.63 प्रतिशत यानि 196 करोड़ रूपये ही मिल पाए हैं। आर टी आई कार्यकरता पी पी कपूर ने बताया कि यहां चल रहे कार्यों की स्थिति बारे बताने को कोई भी अधिकारी तैयार नहीं। डीएम वाराणसी व मुख्य सचिव  उत्तर प्रदेश को एक व चार जनवरी को लगाए गए दो-दो अलग आरटीआई आवदेनों को एक दूसरे के पाले में डालकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं।

स्मार्ट सिटी के तहत हरियाणा की राजधानी के हाल
केन्द्र शासित और हरियाणा की राजधानी  चण्डीगढ़ भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल है। चंडीगढ को स्मार्ट बनाने के लिये प्रोजेक्ट में  6800 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। इसमें से भारत सरकार ने सिर्फ 196 करोड़ रूपये जबकि यूटी प्रशासन 100 करोड़ रूपये ही दे पाया है। बीते तीन वर्षों में स्मार्ट सिटी मिशन के दफ्तर के रैनोवेशन पर 6.76 करोड़ रूपये खर्च करने के अलावा कोई काम नहीं हुआ। कुल 4982 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले सैक्टर 43 में चार प्रमुख प्रोजेक्टों (चिल्ड्रन पार्क, शॉपिंग मॉल, फाईव स्टार होटल, आर्ट गैलरी, म्यूजियम  के लिए भूमि का स्टेट्स स्पष्ट ना होने से प्रोजेक्ट रूका हुआ है।

सीएम सिटी करनाल कब बनेगी स्मार्ट 
सीएम सिटी करनाल को स्मार्ट बनाने के लिये प्रोजेक्ट में 1211 करोड़ रूपये में से अबतक 50 करोड़ रूपये केन्द्र सरकार और 53 करोड़ रूपये राज्य सरकार ने दिए। इसमें प्रशासनिक व अन्य खर्चों पर 1.45 करोड़ रूपये खर्च किए गए। अभी तक करनाल में 12.52 करोड़ रूपये के चार प्रोजेक्ट अन्य विभागों के तालमेल से पूरे किए गए है।  जबकि 20.15 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट अन्य विभागों के तालमेल से चल रहे हैं। वहीं 125.60 करोड़ रूपये के कार्यों टेंडर आमंत्रित किये जा रहे हैं। 349.63 करोड़ रूपये की परियोजनाओं की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई जा रही है।

स्मार्ट सिटी फरीदाबाद 
फरीदाबाद को स्मार्ट बनाने के लिये प्रोजेक्ट में 2458.58 करोड़ रूपये में से 390 करोड़ फरिदाबाद को मिले है। जिसमें से 196 करोड़ रूपये भारत सरकार ने और 194 करोड़ रूपये राज्य सरकार ने दिए है। इनमें से मात्र 28.59 करोड़ रूपये प्रोजेक्टस पर खर्च किए गए जबकि 4.64 करोड़ रूपये प्रशासनिक व अन्य खर्चों किये गये है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के प्रमुख कार्य
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट बनाये जाने वाले सिटीज में किये जाने वाले कार्यों में प्रचुर जलापूर्ति, 24 घंटे बिजली सप्लाई, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, सुचारू पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, गरीब वर्ग के लिए सस्ते मकानों का निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिकों विशेषकर महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा, स्वच्छ प्रशासन, ई-गवर्नैंस, पर्यावरण सुरक्षा आदि है।


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