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कुरुक्षेत्र के रण में बाहरी बनाम बाहरी


















Chandigarh,22April,2019 NewsRoots18
कुरुक्षेत्र की सियासी जमीन बाहरी राजनेताओं के लिए शुरू से ही काफी मुफीद रही है। 1977 में कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट का गठन होने के बाद 11 बार लोकसभा चुनाव हुए। इनमें से केवल 3 बार ही स्थानीय प्रत्याशी चुनाव जीते, जबकि 8 बार बाहरी प्रत्याशियों ने संसद में कुरुक्षेत्र की नुमाइंदगी की। दिलचस्प बात यह है कि इस बार भी भाजपा, कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल जैसे तीन प्रमुख दलों ने बाहरी प्रत्याशियों को ही कुरुक्षेत्र में अपना टिकट थमाया है। इस बार का चुनाव परिणाम एक बार फिर यह साबित कर सकता है कि वास्तव में ही कुरुक्षेत्र की राजनीतिक जमीन बाहरी नेताओं के लिए उपयुक्त चरागाह है। 
 
यदि हम कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र के इतिहास पर नजर डालें, पहले यह कैथल लोकसभा क्षेत्र होता था, लेकिन 1977 में कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र का गठन हुआ और पहली बार यहां से बीएलडी के रघुवीर सिंह चुनाव जीते। रघुवीर सिंह करनाल के रहने वाले थे। उसके बाद 1980 में मनोहर लाल ने जनता पार्टी एस के टिकट पर चुनाव जीता। वह भी कुरुक्षेत्र के स्थानीय निवासी नहीं थे। 1984 में कांग्रेस के हरपाल सिंह कुरुक्षेत्र से सांसद बनने में कामयाब हुए। वे टोहाना के रहने वाले थे। 1989 में जनता दल ने कुरुक्षेत्र के स्थानीय निवासी गुरदयाल सैनी को अपना टिकट थमाया और गुरुदयाल सैनी ने जीत हासिल की। यह पहला मौका था जब कुरुक्षेत्र से किसी स्थानीय व्यक्ति की सांसद के रूप में जीत हुई हो।

1991 में फिर करनाल के तारा सिंह को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया और तारा सिंह बाहर से आकर क्षेत्र के सांसद बन गए। 1996 का लोकसभा चुनाव आया पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल अपनी हरियाणा विकास पार्टी का गठन कर चुके थे और उन्होंने हिसार के प्रसिद्ध उद्योगपति ओम प्रकाश जिंदल को टिकट दिया। ओम प्रकाश जिंदल यहां से चुनाव जीत गए थे। 1998 में मध्यावधि चुनाव हुआ हरियाणा लोक दल राष्ट्रीय की कैलाश सैनी कुरुक्षेत्र से सांसद बनने में कामयाब हुई। एक बार फिर 1999 में मध्यावधि चुनाव हुआ इंडियन नेशनल लोकदल की टिकट पर कुरुक्षेत्र से सांसद बनी। यह तीसरा मौका था जब कोई स्थानीय व्यक्ति कुरुक्षेत्र सीट से सांसद बना। 2004 के चुनाव में ओम प्रकाश जिंदल ने अपने बेटे नवीन जिंदल को कांग्रेस का टिकट दिलाया और युवा उद्योगपति नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र से सांसद बन गए।

अब 2009 का चुनाव आया तो एक बार फिर जनता ने नवीन जिंदल पर अपना भरोसा जताया और हिसार के रहने वाले नवीन जिंदल दूसरी बार कुरुक्षेत्र से सांसद बने। साल 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार सैनी ने कुरुक्षेत्र से जीत हासिल की है। वे अंबाला जिले के नारायणगढ़ के रहने वाले हैं। मसलन 11 बार के लोकसभा चुनाव में 8 बार बाहरी प्रत्याशियों ने कुरुक्षेत्र से सांसद बनने में कामयाबी हासिल की। 

अब लोकसभा के चुनाव का बिगुल बजा तो भी राजनीतिक दलों को यह सीट बाहरी प्रत्याशियों के लिए मुफीद नज़र आई। भारतीय जनता पार्टी ने अंबाला जिले के नारायणगढ़ के विधायक नायब सैनी कांग्रेस को टिकट दिया। कांग्रेस ने अंबाला के नग्गल हलके के पूर्व मंत्री निर्मल सिंह और इंडियन नेशनल लोकदल ने सिरसा के रहने वाले अभय चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला को अपना उम्मीदवार बनाया है। उम्मीद है कि इस सीट पर तिकोना मुकाबला होगा, लेकिन इन तीनों में से कोई भी संसद पहुंचता है तो वह भी बाहरी प्रत्याशी होगा। कुल मिलाकर इस चुनाव में एक बार फिर यह साबित हो जाएगा कि आखिर कुरुक्षेत्र की जनता बाहरी प्रत्याशियों को तरजीह देती है या फिर इसी वजह से राजनीतिक दल बाहरी प्रत्याशियों को यहां थोपते हैं।

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