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नवीन जिंदल कारोबार बचाएंगे या राजनीति चमकाएंगे?


Chandigarh,18April2019 NewsRoots18
कुरुक्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व सांसद नवीन जिंदल पूरी तरह से पशोपेश में फंस गए हैं। एक तरफ कारोबार है और दूसरी तरफ  सियासत! इसी उलझन में नवीन जिंदल कोई बड़ा फैसला नहीं ले पा रहे हैं। दरअसल जब से केंद्र में भाजपानीत नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, तभी से नवीन जिंदल के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। देश के जानेमाने उद्योगपितयों में शुमार नवीन जिंदल पिछले एक दशक से घाटा झेल रहे हैं। कारोबार और सियासत दोनों ही जिंदल के लिए घाटे का सौदा बन गए हैं। स्टील किंग के नाम से विख्यात नवीन जिंदल ने पिछले कुछ सालों में अपने पांव पावर उद्योग में पसारे और उनकी कंपनी जेएसपीएल ने देखते ही देखते एक बड़ा मुकाम हासिल किया। न केवल मुकाम  बल्कि मुनाफा भी कमाया। इसी का नतीजा था कि उनकी कंपनी के शेयर भी आसमान छूने लगे, लेकिन अब न तो नवीन  जिंदल की राजनीति बुलंदियों पर है और न ही उनका कारोबार। केंद्र में सरकार बदलते ही नवीन जिंदल के ग्रह भी बदल गए। एक के बाद एक राज्यों में कांग्रेस सरकारों की विदाई होती रही और जेएसपीएल के कांट्रेक्ट सिमटते चले गए। कहा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नवीन जिंदल फूटी आंख नहीं सुहाते। मोदी के इसी नजरिए की कीमत नवीन जिंदल आज भी चुका रहे हैं। हाल के दिनों में नवीन जिंदल मंचों से भी कह चुके हैं कि उद्योगपतियों को राजनीति में कीमत चुकानी पड़ रही है। उनका इशारा किस तरफ है, यह साफ समझ आ रहा है। इन  दिनों नवीन जिंदल और उनकी कंपनी दोनों ही अच्छे दौर में नहीं हैं। हालांकि कंपनी की रैंकिंग में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन जिंदल की राजनीति भंवर में है। मौजूदा दौर में नवीन जिंदल के सामने दो विकल्प हैं, या तो अपनी राजनीति को चमका लें या फिर अपने कारोबारको बचा लें। वह कौन से विकल्प चुनते हैं, यह उन पर ही निर्भर करता है। यदि जिंदल राजनीति को चुनते हैं और केंद्र में फिर से भाजपा की सरकार आती है, तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं और इस बार चुनाव नहीं लड़ते हैं तो उनकी सियासत की विरासत खतरे में पड़ती है। अब देखना ये होगा कि नवीन जींदल क्या फैसला लेते है।

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