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प्राइवेट स्कूलों के नाम से हटेगा 'पब्लिक' शब्द




Chandigarh,09June,2019 NewsRoots18
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में देश के तमाम निजी स्कूलों के नाम से पब्लिक शब्द हटाने की सिफारिश की गई है। नई शिक्षा नीति के में सुझाव दिया गया है कि पब्लिक शब्द का इस्तेमाल केवल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल ही कर सकते है। नई शिक्षा नीति में सरकारी और निजी स्कूलों के एक जैसे नियम बनाने पर भी जो दिया है।

पूर्व इसरो प्रमुख और वरिष्ट वैज्ञानिक के. कस्तूरींगन की अध्यक्षता में बनी नई शिक्षा नीति बनाने वाली कमेटी ने यह सुझाव सरकार दिया है। कमेटी ने 31 मई को मानव संसाधन विकास मंत्री को रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें निजी स्कूलों को अपने नाम से पब्लिक शब्द हटाने के लिए तीन साल का समय दिया गया है। 

रिपोर्ट में सरकार से स्कूली शिक्षा में ऐसे निजी ऑपरेटरों को रोकने की भी सिफारिश की गई है जो शिक्षा के मूल स्वभाव को नस्ट करते हुए स्कूल को व्यवस्यासिक तौर पर चलाते है। कमेटी ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर भी रोक लगाने को कहा है रिपोर्ट के मुताबिक निजी स्कूल अपने लिए फीस का निर्धारण करने के लिए स्वतंत्र तो होंगे लेकिन मनमाने ढंग से फीस बढ़ोतरी नहीं कर सकते है। सार्वजनिक जांच के दायरे में रहते हुए बढती लागत के कारण ही तार्किक बढ़ोतरी कर सकेंगे। स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथारिटी की ओर से प्रत्येक तीन साल में मुद्रा समीति आदि के कारण फीस में जायज बढोतरी की जाएगी।

नई शिक्षा नीति में दिए गए सुझावों में से 75 प्रतिशत से ज्यादा सुझाव 2023 तक लागू करने सिफारिश की गई है। वहीं बाकी बचे सुझावों को भी 2030 तक चरणबद्ध लागू करने को कहा गया है। रिपोर्ट में राष्ट्रीय शिक्षा आयोग गठन के साथ - साथ मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय करने का भी सुझाव दिया गया है।

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