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महाराष्ट्रा एपीसोड पर तरोताजा प्रेरक गीत।




महाराष्ट्रा एपीसोड पर तरोताजा प्रेरक गीत।

   "जब भी वक्री हुआ शनि"
देखो शनि का अजब करिश्मा, वक्री जब भी हुआ शनि।
कल तक गुर्राता शेर गरजता, मैं मैं बकरी हुआ अभी।
रवि से ले कर मंगल बुध भी,शुक्र तक भी मंगल था।
शनि ने आते पल्टी बाजी, स्वप्न महल सब जंगल था।
जली चिता सी उम्मीदें सब,और सपनों की फसल घनी।।
  देखो शनि का अजब करिश्मा---------------।।
रात सोये तो कुर्सी रानी, आलिंगन करती झूम रही थी।
आंख खुली तो वही पटरानी, किसी और की बनी खड़ी थी।
स्वप्न सुहाने नींद लोक ने, भेज दिया फिर गली गली।।
    देखो शनि का अजब करिश्मा-------------।।
जैसे को ये हुआ है तैसा,दोष किसी का क्या कहना।
सोने की चाह छोड़ी चांदी, चले पहनने पीतल गहना।
चमकने वाली चीज कहां कब, हर पल सोना हुई कभी।।
देखो शनि का अजब करिश्मा----------------।।
         रजिन्द्र बंसल अबोहर ।
          7259040877.

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